जिंदगी दो पल की – जियो जी भर के

नंदन वन में कुटकुट गिलहरी रहती थी। कुटकुट गिलहरी बहुत ईमानदार और बहुत मेहनती थी। वह जंगल के राजा शेर सिंह के यहाँ नौकरी करती थी, शेर सिंह ने उसे 10 बोरी अखरोट देने का वादा किया था। इसीलिए गिलहरी पूरी लगन और मेहनत से अपना काम करती थी। शेर सिंह को खुश करने के लिए वो कई बार तो बहुत ज्यादा काम भी करती थी उसे खुशी थी कि उसका मालिक उसे 10 बोरी अखरोट देगा जिन्हें वो मजे से खायेगी और सारी जिंदगी आराम से रहेगी।

कुटकुट रोज समय से काम पे जाती और पूरा काम करके ही वापस आती, कई बार वो काम करते करते थक जाती थी तो सोचती कि थोड़ा आराम कर लूँ लेकिन फिर अचानक अखरोट का ख्याल आता तो वह फिर से काम में लग जाती।

कभी कभी काम करते समय वो अपनी मित्र गिलहरियों को खेलते हुए, मस्ती करते हुए देखती तो उसका भी मन करता कि मैं भी दोस्तों के साथ खेलूं और मस्ती करूँ लेकिन जैसे ही अखरोट की याद आती वो लालच में फिर से काम करने में लग जाती।

शेर सिंह कभी कभी उसे बाहर शहर भी काम से भेजा करता था। वह कुटकुट के काम से बेहद खुश था, ऐसा नहीं था कि शेर सिंह ईमानदार नहीं था। शेर सिंह भी ईमानदार था और अपनी जुबान का पक्का भी था।

समय का चक्र अपनी गति से चलता गया। एक समय ऐसा भी आया जब शेर सिंह ने अपने वादे के अनुसार गिलहरी को 10 बोरी अखरोट देकर खुशी से आजाद कर दिया।

गिलहरी खुशी खुशी अखरोट लेकर चली आई। अचानक उसे कुछ ख्याल आया और उसकी आँखों से आँसू निकल आये, वो सोचने लगी – मेरी पूरी जिंदगी तो काम करते करते बीत गयी और अब तो मेरे पैने दाँत भी पूरे घिस चूके हैं अब ये अखरोट किस काम के? कुटकुट के आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

दोस्तों आज के समाज में कुछ ऐसा ही हाल हम लोगों का भी है। इंसान अपनी सारी इच्छाओं को त्यागकर, अपनी जरूरतों को कम करके दिन रात पैसा जोड़ता है। वो सोचता है कि वह आगे आने वाले समय में इस पैसे से आराम और ऐश करेगा। और इसी चक्कर में इंसान ना जाने कितनी तकलीफें झेलता है? ना जाने कितने सपनों को अधूरा छोड़ देता है? लेकिन अंत समय में इंसान की आँखें खुलती हैं जब वो किसी लायक नहीं रह जाता।

दोस्तों ऐसे पैसे कमाने से क्या फायदा जिसको इकठ्ठा करने में आपका पूरा जीवन ही खराब हो जाये और वो पैसा खुद आपके किसी काम का ना रहे। जीवन में एक बात जरूर याद रखना – “समय से कीमती कोई चीज़ नहीं, इस दुनियाँ में ऐसा कोई अमीर पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके।”

मित्रों मुझे उम्मीद है इस कहानी को पढ़कर आपको बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। छोटी सी जिंदगी है यारो, हर पल का आनंद लो।

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धन्यवाद!!!!!

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બેકરારી

ચોતરફ માત્ર બેકરારી છે,

બંધ મુઠ્ઠીને મેં ઉઘાડી છે.

છે સ્મરણ એનું દુઃખતી રગ ને

મેં સતત આંગળી અડાડી છે.

શબ્દ અમથા નહીં સજે અર્થો

કૈંક ધક્કે કલમ ઉપાડી છે.

તક અહલ્યાની જેમ શાપિત છે

આપણે ઠેસ ક્યાં લગાડી છે ?

આપમેળે ગમે તો છે અચરજ

આપણે જિંદગી ગમાડી છે.

“ક્યાં છે તું”

એક સ્ત્રી ક્યારેય નવરી નથી પડતી, થાકવાનો તો એને જાણે અધિકાર જ નથી, ક્યારેક જો એનાથી બોલાઈ જાય કે હું થાકી ગઈ છું, તો, ઠપકાઓ નો વરસાદ વરસી પડે એના પર, “બસ. . . આટલું કામ કરી ને થાકી ગયા ???” એના જીવન ની ઘડિયાળ ને લોકો ધબ્બા મારી મારી ને ચલાવે છે, આજીવન એનું આ ચક્ર ચાલતું રહે છે, અને અંત માં એક દિવસ આ ઘડિયાળ બંધ પડી જય છે,
હંમેશ માટે. . .

અને પછી. . .
એ બધાના જીવનની ઘડિયાળ ખોરવાઈ જાય છે, જેનો પાવર એ એક જ સ્ત્રી ના હાથ માં હતો, ત્યારે એની કિંમત સમજાય છે. જયારે એ જતી રહે છે ત્યારે તમે એને યાદ કરો છો કે, ……”ક્યાં છે તું”……